हैरान हूं परेशान हूं
अभी भी मैं किसान हूं
धुएं का जो गुबार है
उठ रहा बारंबार है
खालिआन जो अब शांत है
सड़क पे उतरा प्रांत है।
देश अपना जान के,
चल रहा मैं शान से,
मगर ये कैसी ज्योत है?
जो जल रही जला रही
बस आग ही फैला रही,
हैरान हूं परेशान हूं
हां मै वही गुजरा हुआ नौजवान हूं
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