Monday, December 30, 2019

हैरान हूं

हैरान हूं परेशान हूं 
अभी भी मैं किसान हूं
धुएं का जो गुबार है
उठ रहा बारंबार है
खालिआन जो अब शांत है
सड़क पे  उतरा प्रांत  है।
देश अपना जान के,
चल रहा मैं शान से,
मगर ये कैसी ज्योत है?
जो जल रही जला रही
बस आग ही फैला रही,
हैरान हूं परेशान हूं 
हां मै वही गुजरा हुआ नौजवान हूं

पर्वत पर बैठे हैं महादेव

मोोर्य कालिन गुफाओं के साथ हर हर महादेव                                                                       PC - Internet हिन्दू धर्म के म...